इराक़

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الجمهورية العراقية
जम्हूरिया-अल-ईराकिया (अरबी)
आधिकारिक भाषाएँ अरबी, कुर्दिश
राजधानी बग़दाद
राष्ट्रपति गाज़ी अल यावर (interim)
प्रधानमंत्री इयाद अलावी (interim)
क्षेत्रफल
 - कुल
 - % जल
स्थान: ५७ वाँ
४३७,०७२ वर्ग कि.मी.
१.१%
जनसँख्या
 - कुल (जुलाई २००४)
 - घनत्व
स्थान ४४ वाँ
२५,३७४,६९१
५९/कि.मी.;
आज़ादी -३१ अक्टूबर, १९३२ (इंग्लैंड से)
-जून २८, २००४ (अमरीकी सेनासे)
सकल घरेलू उत्पाद
 - कुल (२००३)
 - /प्रति व्यक्ति
स्थान: ७६ वाँ
३८.७९० बिलियन डालर
१,६०० डालर
मुद्रा ईराकी दिनार
समय क्षेत्र ग्रीनविच मानक समय +३
राष्ट्र्गीत अरदुलफ़ुरतैनी वतन (कुर्दी: रक़ीब द्वारा लिखित)
इंटरनेट डोमेन .iq
कालिंग कोड ९६४
राजधर्म
(धार्मिक स्वतंत्रता)
इस्लाम


इराक़ एशिया महाद्वीप में स्थित देश है । इसके दक्षिण में सउदी अरब और कुवैत, पश्चिम में ज़ॉर्डन और सीरिया, उत्तर में तुर्की और पूर्व में ईरान अवस्थित है । दक्षिण पश्चिम की दिशा में यह फ़ारस की खाड़ी से भी जुड़ा है । दजला और फ़ुरात इसकी दो प्रमुख नदियाँ हैं जो इसके इतिहास को ५००० साल पीछे ले जाती हैं। इसके दोआबे में ही मेसोपोटामिया की सभ्यता का उदय हुआ था ।

इराक़ के इतिहास में असीरिया के पतन के बाद विदेशी शक्तियों का प्रभुत्व रहा है । फ़ारसी शासन में रहने के बाद (सातवीं सदी तक) इसपर अरबों का प्रभुत्व बना । अरब शासन के समय यहाँ इस्लाम धर्म आया और बगदाद अब्बासी खिलाफत की राजधानी रहा । तेरहवीं सदी में मंगोल आक्रमण से बगदाद का पतन हो गया और उसके कुछ सालों बाद तुर्कों (उस्मानी साम्राज्य) का प्रभुत्व यहाँ पर बन गया । वर्तमान में अमेरिका के नेतृत्व में नैटो की सेना की यहाँ उपस्थिति बनी हुई है ।

राजधानी बगदाद के अलावा बसरा, किरकुक तथा नज़फ अन्य प्रमुख शहर हैं । यहाँ की मुख्य बोलचाल की भाषा अरबी और कुर्दी भाषा है पर दोनों में से किसी को भी सांवैधानिक दर्जा नहीं मिला है ।


अनुक्रम

इतिहास

इराक़ के इतिहास का आरंभ बेबिलोनिया और उसी क्षेत्र में आरंभ हुए कई अन्य सभ्यताओं से होता है । लगभग 5000 ईसापूर्व से सुमेरिया की सभ्यता इस क्षेत्र में फल-फूल रही थी । इसके बाद बेबीलोनिया, असीरिया तथा अक्कद के राज्य आए । इस समय की सभ्यता को पश्चिमी देश एक महान सभ्यता के रूप में देखते हैं । इसका मुख्य कारण यह है कि लेखन का विकास सर्वप्रथम यहीं हुआ । इसके अलावा विज्ञान, गणित तथा कुछ अन्य विधाओं का सबसे आरंभिक प्रमाण भी यहीं मिलता है । इसका दूसरा प्रमुख कारण ये है कि मेसोपोटामिया (आधुनिक दज़ला और फ़ुरात नदियों की घाटी का क्षेत्र) को प्राचीन ईसाई और यहूदी पूर्वजों का निवास स्थान माना जाता है । आरंभ के यूरोपीय इतिहासकारों ने बाईबल के मुताबिक इतिहास की शुरुआत 4400 ईसापूर्व माना था । इसकारण बेबीलोन (जिसे बाबिली सभ्यता भी कहा जाता था) तथा अन्य सभ्यताओं को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता माना गया । हँलांकि वैज्ञानिक विधियों से इसकी संतोषजनक पुष्टि होती है, इस बात को बाद के यूरोपीय इतिहासकारों ने मानने से मना कर दिया कि यहीं से इंसान की उत्पत्ति हुई थी । इस स्थल को यहूदियों तथा इसाईयों के (और इस कारण इस्लाम के कुछ) धर्मगुरुओं (पैग़म्बरों तथा मसीहों) का मूल-स्थल मानने पर अधिकांश इतिहासकार सहमत हैं ।

फ़ारस के हखामनी (एकेमेनिड) शासकों की शक्ति का उदय ईसा के छठी सदी पूर्व हो रहा था । उन्होंने मीदियों तथा बाद के असीरियाइयों को हरा कर आधुनिक इराक़ पर कब्जा कर लिया । सिकन्दर ने 330 इसापूर्व में फ़ारस के शाह दारा तृतीय को कई युद्धों में हरा कर फ़ारसी साम्राज्य का अन्त कर दिया । इसके बाद इराकी भूभाग पर यवनों तथा उनके सहायकों तथा बाद में रोमनों का आंशिक प्रभाव रहा । रोमनों की शक्ति जब अपने चरम पर थी (130 इस्वी) तब ये फ़ारस के सासानियों के अधीन थी ।

इस्लाम

इसके बाद जब अरबों का प्रभुत्व बढ़ा (630 इस्वी) तब यह अरबों के शासन में आ गया । फ़ारस पर भी अरबों का प्रभुत्व हो गया और 735 में बग़दाद इस्लामी ख़िलाफ़त की राजधानी बनी । यह क्षेत्र इस्लाम के केन्द्र बन गया । बगदाद में इस्लाम के विद्वानों ने पुस्तकालयों का निर्माण करवाया । इस्लाम का प्रसार हो रहा था और बगदाद का महत्व बढ़ता जा रहा था । 1258 में मंगोलों ने बग़दाद पर कब्जा कर लिया । उन्होंने भयंकर नरसंहार किया और पुस्तकालयों को जला दिया ।

उस्मानी तुर्कों (ऑटोमन) ने सोलहवीं सदी के अन्त में बग़दाद पर अधिकार किया । इसके बाद फ़ारस के सफ़वी वंश तथा तुर्कों के बीच बग़दाद तथा इराक़ के अन्य हिस्सों के लिए संघर्ष होता रहा । तुर्क अधिक शक्तिशाली निकले । बाद में नादिर शाह ने कई बार तुर्कों के खिलाफ़ हमला बोला पर वो भी महत्वपूर्ण शहरों पर कब्जा करने में नाकामयाब रहा ।

सद्दाम हुसैन का साथान आधुनिक इराक़ी इतिहास में बहुत प्रमुखता से लिया जाता है । उसने बाथ पार्टी के सहारे अपना राजनैतिक सफ़र शुरु किया । उसने पहले तो इराक को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने का प्रयत्न किया पर बाद में उसने कुर्दों तथा अन्य लोगों के खिलाफ़ हिंसा भी करवाई । बाद में अमेरिकी नेतृत्व में नैटो की सेनाओं के 2003 में इराक़ पर चढ़ाई करने के बाद इसे ग़िरफ़्तार कर लिया गया और एक मुकदमे मे सद्दाम हुसैन को फ़ांसी की सज़ा मिली ।

अभी इराक़ में नैटो की सेनाएं बनी हुई हैं ।


विभाग

इराक के 18 प्रशासनिक विभाग हैं । इन्हें अरबी में मुहाफ़धा और कुर्दी में पारिज़गा कहते हैं । इनका विवरण इस प्रकार है -

इराक़ के प्रशासनिक मंडलों का संख्यावार चित्र
  1. बग़दाद
  2. सला अल दीन
  3. दियाला
  4. वासित
  5. मयसन
  6. अल बसरा
  7. धी क़र
  8. अल मुतन्ना
  9. अल-क़ादिसिया
  10. बाबिल
  11. करबला
  12. अल नजफ़
  13. अल अनबार
  14. निनावा
  15. दहुक
  16. अर्बिल
  17. अत तमीम (किरकुक)
  18. सुलेमानिया


इनमे से आख़िरी के तीन इराक़ी कुर्दिस्तान में आते हैं जिसका एक अलग प्रशासन है ।

यह भी देखिए

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